नई दिल्ली: हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों की लेबलिंग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। FSSAI ने प्रमुख कंपनियों की ओर से हाई-कैफीन वाले पेय पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘Energy Drink’ लेबल में बदलाव के लिए दी गई 90 दिन की समयसीमा को बढ़ाने की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, PepsiCo, Red Bull, Monster Beverage और Reliance समेत कई कंपनियों ने लेबलिंग में बदलाव के लिए अधिक समय देने की मांग की थी। कंपनियों का तर्क था कि बाजार में पहले से बड़ी मात्रा में तैयार उत्पाद और पैकेजिंग स्टॉक मौजूद है। ऐसे में लेबल बदलने के लिए 90 दिन की अवधि पर्याप्त नहीं है।
कंपनियों ने समयसीमा को बढ़ाकर करीब एक साल करने का अनुरोध किया था, लेकिन FSSAI ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
FSSAI के रुख के पीछे पेय पदार्थों की श्रेणी और लेबलिंग से जुड़े नियम प्रमुख कारण हैं। नियामक के अनुसार, भारतीय खाद्य नियमों में ‘Energy Drink’ नाम की अलग मानकीकृत श्रेणी निर्धारित नहीं है। ऐसे में हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों पर इस शब्द के इस्तेमाल को लेकर नियामकीय सवाल उठे हैं।
नियमों के तहत संबंधित कंपनियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग में आवश्यक बदलाव करने होंगे।
लेबलिंग नियमों के अनुपालन को लेकर कुछ राज्यों में कार्रवाई की खबर भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, राजस्थान में Pepsi के Sting, Reliance के Campa Energy और Red Bull सहित बड़ी संख्या में उत्पादों की जांच और जब्ती की कार्रवाई की गई है।
लद्दाख में भी अधिकारियों की ओर से नियमों के तहत बाजार में मौजूद स्टॉक की जांच और कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
FSSAI के फैसले के बाद हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और बाजार में मौजूद स्टॉक को लेकर बदलाव करना पड़ सकता है।
कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पहले से तैयार पैकेजिंग और बाजार में मौजूद मौजूदा स्टॉक को लेकर है। यदि तय अवधि में लेबलिंग में बदलाव नहीं किया जाता है, तो नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
FSSAI की इस कार्रवाई का सीधा असर मुख्य रूप से उत्पादों की लेबलिंग और श्रेणीकरण पर पड़ सकता है। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को किसी पेय पदार्थ की प्रकृति, कैफीन की मात्रा और उससे जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो।
फिलहाल FSSAI ने कंपनियों की 90 दिन की समयसीमा बढ़ाने की मांग को स्वीकार नहीं किया है। वहीं, अलग-अलग राज्यों में खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर जांच और कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई है।
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